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Showing posts from May, 2019

राष्ट्रपति के अनुरोध पर संन्यास के बाद दोबारा कप्तान बने इमरान, टीम को वर्ल्ड चैम्पियन बनाया

खेल डेस्क. पाकिस्तान की टीम 1987 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज में 6 में से 5 मैच जीत चुकी थी। उसे एक में सिर्फ हार का सामना करना पड़ा। वेस्टइंडीज ने ग्रुप स्टेज के आखिरी मुकाबले में पाक को 28 रन से हरा दिया। इसके बावजूद इमरान खान की कप्तानी में टीम 8 साल बाद सेमीफाइनल में पहुंच गई थी।सेमीफाइनल में मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था। इमरान टॉस हार गए। ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में पाकिस्तान को 268 रन का लक्ष्य दिया। जवाब में पाक की पूरी टीम 249 रन पर ऑलआउट हो गई। लाहौर में ऑस्ट्रेलिया 18 रन से जीतकर फाइनल में पहुंच गया। हार के बाद इमरान खान ने संन्यास ले लिया। उनके स्थान प र अब्दुल कादिर को टीम की कमान सौंपी गई। उनके नेतृत्व में टीम 5 में 4 मैच हार गई। सिर्फ एक में जीत मिली। इंग्लैंड से सीरीज के बाद पाक को वेस्टइंडीज का दौरा करना था। तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक क्रिकेट देखने के शौकीन थे। उन्होंने टीम की खराब हालत को देखते हुए इमरान से संन्यास वापस लेने के लिए कहा। इमरान ने वापसी की, लेकिन टीम वेस्टइंडीज में पांचों वनडे मैच हार गई, लेकिन टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर करा ली। इमरान ने दो बार वर्ल्...

Благотворитель против соратницы Навального: конфликт на выборах в Мосгордуму

На выборах в Мосгордуму, которые пройдут в сентябре 2019 года, наиболее конфликтным для оппозиции оказался один из центральных избирательных округов. Там на выдвижение претендуют соратница оппозиционера Алексея Навального Любовь Соболь и учредитель фонда помощи хосписам "Вера" Нюта Федермессер. Нюта (Анна) Федермессер и Любовь Соболь претендуют на выдвижение в 43-м избирательном округе Москвы. Туда входят три района ЦАО - Хамовники, Арбат и Пресненский - в которых традиционно сильна поддержка оппозиции. Юрист Фонда борьбы с коррупцией Любовь Соболь объявила о выдвижении на фоне собственной кампании по расследованию поставок питания в детские сады и школы Москвы - ими занимаются фирмы, связанные с Евгением Пригожиным. Федермессер, известный общественный деятель, в последние годы тесно работает с властью. В ноябре прошлого года она стала членом Общероссийского народного фронта, который возглавляет президент России Владимир Путин, а на выборах мэра Сергея Собянина в сент...

जिस कश्मीरी पंडित पर गोली चली वो कश्मीर लौटे तो क्या हुआ?

श्रीनगर के ज़ियाना कदाल इलाक़े की पतली गलियों में रोशन लाल मावा की दुकान कल से पहले तक 1990 से बंद थी. 90 के चरमपंथ के दौर में लाखों कश्मीरी पंडित कश्मीर से पलायन कर गए. लेकिन अब 29 साल बाद मावा के लिए एक अलग कहानी शुरू हुई है. बुधवार को मावा ने ज़ियाना कदाल इलाक़े की अपनी दुकान को दशकों बाद खोला है. उनकी दुकान का दोबारा खुलना कोई सामना गतिविधि नहीं थी. जब उन्होंने दोबारा अपना ड्राई फ्रुट्स का व्यापार शुरू किया तो स्थानीय दुकानदारों ने न सिर्फ़ उनका स्वागत किया बल्कि सराहना भी की. मावा के पिता भी इसी इलाक़े में ड्राई फ्रूट ही बेचते थे. 70 साल के मावा ने 1990 में कश्मीर घाटी को छोड़ा था. तब अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में वो घायल हो गए थे. चार गोलियां उन्हें लगी थीं. इस हमले ने मावा को कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था. गुरुवार को मावा की दुकान पर बड़ी तादाद में स्थानीय मुसलमान पहुंचे. इनमें उनके दोस्त भी थे और पुराने परिचित भी. वो उन्हें गले लगा रहे थे. कश्मीर छोड़ने के बाद मावा दिल्ली में बस गए थे और वहां अपना कारोबार चला रहे थे. वो कहते हैं, दिल्ली में रहते हुए मैं ...